अविस्मरणीय कवि सम्मेलन

दिनांक 24/05/2023 को यूथ हॉस्टल, संजय प्लेस के सभागार में स्व. श्रीमती ममता देवी वर्मा जी की चतुर्थ पुण्य स्मृति में “काव्य श्रद्धांजलि” कवि सम्मेलन एवं साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम हिंदुस्तान कॉलेज, फरह के निदेशक डॉ. राजीव उपाध्याय जी के मुख्य आतिथ्य एवं अध्यक्षता संपन्न हुआ।विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हास्य कवि एवं व्यंग्यकार श्री पवन आगरी जी एवं एडिशनल डेवलपमेंट ऑफिसर पंचायती राज विभाग आगरा, श्री विजेंद्र रायजादा जी की गरिमामयी एवं महनीय उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।
शब्दोत्सव फाउंडेशन साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में अंतराष्ट्रीय कवयित्री डॉ. रूचि चतुर्वेदी को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ कोकिलकंठा कवयित्री श्रीमती निशिराज जी की वाणी वंदना से हुआ ततपश्चात् कार्यक्रम के आयोजक श्री रामेन्द्र प्रताप जी ने अपनी बैकुंठवासिनी पत्नी व कवि मोहित सक्सेना की स्वर्गीया माता जी के विषय में उदगार व्यक्त किये।
गंगा किनारे सोरों जी से पधारे राष्ट्रीय गीतकार श्री मनोज मधुबन ने “हृदय में पल रहे इन आंसुओं को मेरी आँखों से बहने दो न रोको “पढ़कर गीतों की गंगा बहाई। श्रीमती श्रुति सिन्हा जी ने नारी विमर्श ,नारी शक्ति पर कविता पढ़कर खूब प्रशंसा प्राप्त की। राष्ट्रीय कवि संगम ब्रज प्रान्त के अध्यक्ष श्री गया प्रसाद मौर्य जी ने मिट्टी की सुगंध से लबरेज लोकगीतों से श्रोताओं का मन मोह लिया। ​प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती निशिराज जी ने अपनी मधुर वाणी में “मै हवा हूँ खुशबू हूँ घटा हूँ इस चमन की मै बाद-ए-सबा हूँ” पढ़कर माहौल में रस घोल दिया। कार्यक्रम के संयोजक वीर रस के कवि मोहित सक्सेना ने अमर शहीद विक्रम बत्रा के सम्मान में ओजपूर्ण रचना पढ़कर श्रोताओं में रोमांच भर दिया। विशिष्ट अतिथि क रूप में पधारे अंतराष्ट्रीय कवि श्री पवन आगरी जी ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में अपने हास्य के पंच से श्रोताओं को कुर्सियों से उछाल दिया |कार्यक्रम का शानदार संचालन कर रहे राष्ट्रीय ओज कवि श्री पदम गौतम जी ने राष्ट्र चेतना के स्वर छेड़े और संस्कारो का संचार किया जब पढ़ा कि “संस्कारो को देने में माता जब भी सो जाती है चक्रव्यूह की चालों में बेटे को खोना पड़ता है ”
जब अंतराष्ट्रीय कवयित्री डॉ. रूचि चतुर्वेदी ने अपनी ओजस्वी वाणी में माँ की महिमा का बखान यह पढ़ते हुए किया कि –
“वो ही ममता का आंचल उड़ाती हमें सारे दुख भूल जाते जिसे ओढ़कर,वो सिखाती हमें सत्य संस्कार को भावना सारी दे भाव को जोड़कर ”
तो कवि सम्मेलन ने अपने प्रकर्ष को छुआ। विशिष्ट अतिथि विजेंद्र रायजादा के प्रेरणास्पद उद्बोधन और अंत में मुख्य अतिथि डॉ राजीव उपाध्याय जी के ज्ञानप्रद शिक्षाप्रद संभाषण ने कार्यक्रम को दिव्यता व गरिमा प्रदान की।कार्यक्रम में उल्लेखनीय रूप से उपस्थित रहे श्री आर पी सक्सेना , श्री नितिन जोहरी , श्री समीर सक्सेना , श्री संजीव श्रीवास्तव, श्री संजीव सक्सेना , श्री लोकेन्द्र भामोरिया , श्री अनुज बंसल , श्री हीरेंद्र नरवार , श्री प्रकाश गुप्ता , श्रीमती कांची सिंघल ,श्रीमती मीनू आनंद , श्री मुकुल कुमार , श्री सुनील शर्मा , श्री यतेंद्र सारस्वत , श्री सुभाष सारस्वत , श्री मदन चित्तोड़िया , श्री आसुतोष ,  सुश्री रजनी सिंह , श्री रजनीश , श्री असीम आनंद , श्री रमेश आनंद जी, श्रीमती विजया तिवारी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे|