लोकमाता अहिल्याबाई वंदना लघुवृत्त प्रोमो लाँच

 

 

 

 

 

आगरा 22मई / पुण्य श्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर वंदना लघु वृत्त वीडियो फिल्म का प्रोमो संस्कृति भवन, डॉ.बी. आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में समानांतर संस्थान एवं साहित्य संगीत संगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से सुशील सरित एवं राजेश्वरी ने अहिल्या वंदना से किया। स्वागताध्यक्ष प्रो.लवकुश मिश्रा ने कहा .आज का यह आयोजन महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। लोकमाता वंदना के रचनाकार डॉ. राजेंद्र मिलन ने कहा -अहिल्याबाई होलकर 30 वर्षों तक बिना कोई युद्ध किए अपनी बौद्धिक क्षमता के बल पर मालवा पर राज्य किया ।उनकी वंदना पर आधारित इस लघु वीडियो फिल्म में उन सारे स्थलों को समाहित किया गया है ,जिनमें प्रमुख रूप से इंदौर का रजवाड़ा ,महेश्वर का किला-मंदिर, विश्वनाथ मंदिर वाराणसी, सोमनाथ मंदिर, नर्मदा नदी के पावन दृश्य एवं कुछ ज्योतिर्लिंगों को समाहित किया गया है। डॉ.मिलन ने स्वागताध्यक्ष प्रो.मिश्रा के स्वागत भाषण में कहे गए इतिहास के ग़लत तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि राजा राममोहन राय के जन्म से तेईस वर्ष पूर्व ही सती प्रथा का विरोध कर जीवित नारी को अग्नि में मृत पति के साथ जलाए जाने का विरोध किया और अमानवीय क्रूर सती प्रथा पर रोक भी लगा दी, स्वयं गौरवान्वित इतिहास का अध्याय रचा।इतिहास में राजा राम मोहन राय को ही उल्लेखित किया जाता है।
लोकमाता वंदना को स्वर दिया है साहित्य भूषण से सम्मानित वरिष्ठ रचनाकार सुशील सरित एवं युवा गायिका कुमारी पूजा तोमर ने। संगीत निर्देशन सुभाष सक्सेना और ताल संगत की परमानंद शर्मा ने ।बिम्ब परिकल्पना अंकुर बंसल की है।मुख्य अतिथि मधु बघेल ने कहा -यह एक ऐसा अनुकरणीय प्रयास है जो इस महान नारी के प्रति लोगों में जागरूकता लाएगा । डॉ. मिलन और सुशील सरित बधाई के पात्र हैं। अध्यक्ष श्रीमती विजयलक्ष्मी के विचार थे कि नारी की संपूर्ण क्षमता पर केंद्रित यह लघु वीडियो चित्र उनके प्रति हम सबकी सच्ची श्रद्धांजलि है।इन्दल सिंह इन्दु ने वीडियो की गुणवत्ता को प्रशंसनीय बताते हुए ‌पूजा तोमर और सुशील सरित को बधाई दी। इस अवसर पर अशोक अश्रु,प्रकाश गुप्ता बेबाक, चंद्रशेखर शर्मा, पदमावती पदम,डॉ रमेश आनंद, सुधीर शर्मा, लोकस फॉर सक्सेस की सम्पादक रजनी सिंह, इन्दल सिंह’इन्दु’ आदि ने लोकमाता को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उपस्थित गणमान्य जनों ने समवेत स्वरों में ऐसे महान चरित्रों का उत्कृष्ट फिल्मांकन होना समसामयिक है।