*अवैध तोड़फोड़ करने वाले नगर निगम अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पीड़ित परिवार ने लगाई गुहार*

*अवैध तोड़फोड़ करने वाले नगर निगम अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पीड़ित परिवार ने लगाई गुहार*
*नगर निगम द्वारा अवैध रूप से धनी व्यक्ति जय अग्रवाल के बहकावे में आकर उससे सांठ-गांठ करके की गई तोड-फोड़ के विरोध में मीडिया से गुहार, हाईकोर्ट में की रिट दायर*
आगरा। विगत सप्ताह नगर निगम द्वारा नॉर्थ विजयनगर कॉलोनी में एक संपत्ति पर की गई तोड़फोड़ को अवैध और अन्याय पूर्ण बताते हुए पीड़ित परिवार ने प्रेस वार्ता कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित परिवार से मनीष अग्रवाल ने पत्रकारों को बताया कि कि नॉर्थ विजय नगर कॉलोनी (हरी पर्वत वार्ड) स्थित सम्पत्ति संख्या 26/233/1 की स्वामिनी श्रीमती पुष्पा देवी पत्नी श्री रामकुमार अग्रवाल है। उन्होंने उपरोक्त सम्पत्ति दिनांक 19/12/2024 को पंजीकृत विक्रय विलेख के द्वारा उसके उसके पूर्व स्वामी श्री रामेश्वर नाथ अग्रवाल पुत्र स्व० श्री बटुकनाथ से क्रय की थी। उपरोक्त सम्पत्ति पर श्री जय अग्रवाल पुत्र स्व० श्री विजय अग्रवाल जिसका एक प्लाट इस सम्पत्ति के पश्चिम दिशा की ओर सम्पत्ति सं० 26/233 है, की काफी समय से हड़पने की नीयत बनी हुयी थी और वह उसके पूर्व स्वामी रामेश्वरनाथ अग्रवाल के विरूद्ध भी विभिन्न विभागों में शिकायतें करता रहा है।
*फर्जी शिकायत पर नगर निगम के अधिकारियों ने 1952 से पूर्व का निर्माण किया ध्वस्त*
मनीष अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में उपरोक्त जय अग्रवाल ने नगर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों से सांठ-गांठ करके उपरोक्त जगह को दिनांक 08/07/2026 को यह कहकर तुड़वा दिया कि मेरी सम्पत्ति की पूरब दिशा की रोड 60 फुट चौडी है और ये सम्पत्ति सड़क घेरकर बनाई हुई है जबकि तथ्य यह है कि उपरोक्त सम्पत्ति नगर निगम के अस्तित्व से पूर्व की है और उपरोक्त सम्पत्ति के आगे नगर निगम की नाली तथा उससे आगे नगर निगम नाली / खरंजा बना हुआ तथा उसके आगे नगर निगम की पक्की डामर रोड बनी हुई है और उपरोक्त नाली व खरंजा सुल्तानगंज रोड पर एक सीधी लाईन में बना हुआ है और मेरा मकान भी उतनी ही सीमा तक बना हुआ जितने उस रोड पर बाकी के मकान बने हुए हैं। अगर मेरा मकान सड़क पर अतिक्रमण करके बनाया गया होता तो नगर निगम की नाली और खरंजा मेरे मकान के आगे नहीं बल्कि मेरे मकान के अंदर होता और मेरा मकान उस लाईन में बाकी मकानों से आगे बना दिखता।
उपरोक्त के अतिरिक्त नगर निगम द्वारा इस सम्पत्ति का जो कर निर्धारण के समय जो सर्वे किया गया था तो नगर निगम के द्वारा मेरी सम्पत्ति के आगे 40 फीट की रोड दर्शायी गयी है जैसा कि उनके द्वारा जारी असिसमेंट रिपोर्ट में दर्शाया गया है।
मेरी सम्पत्ति के उत्तर दिशा की ओर स्थित सम्पत्ति 26/234 सी व सम्पत्ति सं० 26/234 बी जो अभी हाल ही में नई बनायी गई हैं उनके विक्रय पक्ष में भी उपरोक्त 40 फीट की रोड दर्शायी गई है और उपरोक्त रजिस्ट्री के आधार पर ही आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत मानचित्र में 40 फीट की रोड दर्शायी गई है। अतः ऐसी स्थिति में जहाँ नगर निगम के अपने सर्वे के अनुसार तथा आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत मानचित्र में उक्त रोड को 40 फीट दर्शाया जाना यह साबित करता है कि उपरोक्त रोड कभी 60 फीट की रही ही नहीं।
*माननीय उच्च न्यायालय के स्टे आर्डर का भी नहीं लिया संज्ञान*
यह कि पूर्व में भी श्री जय अग्रवाल के पिताजी श्री विजय अग्रवाल ने जब इस जगह के सम्बन्ध में शिकायत की थी तब मेरी उपरोक्त जगह के पूर्व स्वामी के किरायेदार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक रिट याचिका सन् 1991 में प्रस्तुत की थी जिसमें नगर निगम जिसका पूर्व में नगर महापालिका आगरा था, को भी पक्षकार बनाया था तथा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने आदेश दिनांकित 10/10/1991 के द्वारा विपक्षी नगर निगम, एडीए, जिला मजि० आगरा को उपरोक्त सम्पत्ति न तोड़ने के आदेश पारित किये था, जिसकी प्रति किरायेदार श्री प्रकाशचंद बंसल ने उसी समय आगरा नगर निगम में प्रस्तुत कर दी थी और उसकी प्राप्ति की रसीद अपने पास रख ली थी। मेरे व मेरे पुत्रों के द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के उपरोक्त स्टे आर्डर की कॉपी दिखाई तो उन्होंने यह कहकर स्टे आर्डर को मानने से इंकार कर दिया कि हम किसी स्टे आर्डर को नहीं मानते जो इच्छा होगी वही करेंगे और ये कहा कि अगर तुम्हें हमारे खिलाफ कोई कार्यवाही करनी है तो हाईकोर्ट जाओ।
उल्लेखनीय है कि पीड़ित परिवार ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट भी दायर कर दी है।
*मिलीभगत का जताया अंदेशा*
राम कुमार अग्रवाल एवं राकेश अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम आगरा के द्वारा अगर अतिक्रमण हटाकर 60 फीट की रोड पूरी करनी थी तो उन्हें विधिनुसार सड़क के बीच से नाप लेनी थी और फिर दोनों तरफ से पूरी सड़क पर से अतिक्रमण हटाना था परन्तु नगर निगम द्वारा मात्र मेरी सम्पत्ति को पूरी तरह से ध्वस्त किया गया, जिससे उनकी दूषित मानसिकता व जय अग्रवाल के साथ षड्यन्त्र व मिलीभगत साबित होती है।
