*जो युद्ध निरंतर देता है, धरती कब तक वो घाव सहे..*

*जो युद्ध निरंतर देता है, धरती कब तक वो घाव सहे..*
*विश्व कविता दिवस पर आगरा आकाशवाणी से बहेगी ‘काव्य मंदाकिनी’*
आगरा। संयुक्त राष्ट्र की शाखा यूनेस्को द्वारा वर्ष 1999 में की गई घोषणा के अनुसार 21 मार्च को आयोजित ‘विश्व कविता दिवस’ पर आगरा आकाशवाणी केन्द्र से ‘मेरी माटी मेरा देश’ कार्यक्रम में शाम 7:31 बजे ‘काव्य मंदाकिनी’ प्रवाहित होगी।
बुधवार को केन्द्र के *सहायक निदेशक अनेन्द्र सिंह के कुशल संयोजन और निर्देशन* में एक घंटे के कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग की गई। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा निराला पुरस्कार से सम्मानित कवि कुमार ललित ने कार्यक्रम का संचालन किया।
*मैनपुरी से पधारे वरिष्ठ गीतकार सुरेश चौहान ‘नीरव’* ने जिंदगी को परिभाषित करते हुए जिंदगी जीने का संदेश कुछ इस तरह दिया- ” जिंदगी हार और जीत का द्वंद्व है। धूप का गीत है, छाँव का छंद है। इसको हर पल नए स्वर दिए जाइए। बस जिए जाइए, बस जिए जाइए.. ”
*वरिष्ठ कवि-साहित्यकार शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ* ने अपने समय की तस्वीर उकेरते हुए कविता से यह गुहार लगाई- ” लोलुप आस्था ने समाज की समरसता को नष्ट कर दिया। जाति- धर्म की राजनीति ने आदर्शों को भ्रष्ट कर दिया। युग-पीड़ा का गरल निगलने, शिव-तांडव सा नृत्य-नशा दो। कविते! मन-मरुथल सरसा दो”
*जाने माने ग़ज़लकार अशोक रावत* के इन शेरों पर सब देर तक वाह-वाह करते रहे- “इसी कोशिश में दोनों हाथ मेरे हो गए जख्मी। चरागों को जलाना भी, हवाओं से बचाना भी। किसी गफलत में मत रहना, नजर में आँधियों के है। तुम्हारा आशियाना भी, हमारा शामियाना भी.. ”
*वरिष्ठ गीतकार डॉ. राघवेन्द्र शर्मा* ने विश्व के वर्तमान हाल को कुछ यूँ बयाँ किया- ” यह भयानक दौर है, तुम होश में रहना जरा। युद्ध चारों ओर है, तुम होश में रहना जरा। युद्ध के परिणाम से दहशत है पूरे विश्व में। सिरफिरों का जोर है, तुम होश में रहना जरा..”
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सम्मानित *कवि कुमार ललित* ने वर्तमान दौर को ध्यान में रखते हुए विश्व कविता दिवस पर कवियों का कुछ इस तरह आह्वान किया- ” जो युद्ध निरंतर देता है, धरती कब तक वो घाव सहे। हे कवि! कुछ ऐसा लिख दो तुम, करुणा की अविरल धार बहे.. यह धरा न इतनी बंजर हो, फिर गाँधी, नानक बुद्ध न हों। हर ओर प्रेम के पुष्प खिलें, धरती पर बिल्कुल युद्ध न हों। कोई न किसी से टकराये, रिश्तों में जहर नहीं फैले। हे कवि! कुछ ऐसा लिख दो तुम, जिससे पाषाण हृदय पिघले.. ”
अंत में *केन्द्र निदेशक अनेन्द्र सिंह ने सभी का आभार* व्यक्त करते हुए बताया कि इस काव्यगोष्ठी का 22 मार्च, 2026 को शाम साढ़े सात बजे पुनः प्रसारण भी किया जाएगा।
