सेंट एंड्रूज स्कूल के राष्ट्र स्तरीय लगोरी उपविजेताओं का सम्मान

सेंट एंड्रूज स्कूल के राष्ट्र स्तरीय लगोरी उपविजेताओं का सम्मान

सेंट एंड्रूज स्कूल के विद्यार्थियों का वरिष्ठ बालक वर्ग की 11वीं राष्ट्र स्तरीय लगोरी चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का भव्य सम्मानं समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के सीएमडी डॉ. गिरधर शर्मा, प्राचार्या अंशु सिंह, उप प्राचार्य अभिषेक क्रिस्टी, उत्तर प्रदेश लगोरी संघ के टेक्निकल एडवाइजर उदय प्रताप परिहार, संघ के पदाधिकारी, बजमोहन शर्मा, कोच यश गोयल एवं विजय तिवारी, आलोक वैष्णव, विकास गोयल, प्रमोद कुमार , रूबी यादव, नितेश तिवारी, अशोक कुमार, पारस शर्मा आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

यह सम्मान उन खिलाडियों को दिया गया जिन्होंने 11वीं सीनियर नेशनल लगोरी चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित फिजिकल एजुकेशन स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में आयोजित की गई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश लगोरी टीम उपविजेता रही।

इस ऐतिहासिक जीत में सेंट एंड्रूज स्कूल के खिलाड़ियों वंश अग्रवाल, आदित्य वर्मा, कृष्ण वर्मा, शिव गुप्ता एवं तरुण कुमार की अहम भूमिका रही। खिलाड़ियों ने खेल भावना, अनुशासन और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालय के सीएमडी डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि “लगोरी खेल हम सभी के बचपन से जुड़ा हुआ एक परंपरागत भारतीय खेल है। इसे आगे बढ़ाने और खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग देने के लिए सेंट एंड्रूज स्कूल सदैव प्रतिबद्ध रहेगा। उन्होंने बताया कि लगोरी खेल का उल्लेख भागवत पुराण में भी मिलता है, जब भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग के दमन के समय काली दह क्षेत्र में इस खेल को खेला था। वर्तमान में इस खेल को विस्तृत स्वरुप देने का कार्य देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा किया गया है।

उत्तर प्रदेश लगोरी संघ के सचिव बृजमोहन शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि लगोरी आज केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में खेला जा रहा है। इसके बाद से लगोरी की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और इसे एक नई पहचान मिली है।

समारोह का समापन खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन, ट्रॉफी प्रदर्शन और सामूहिक फोटो सत्र के साथ हुआ। विद्यालय प्रबंधन ने भविष्य में भी पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया।